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पाच लोटा की कर्म कहानी

                                              पाच लोटा की कर्म कहानी                                        लोटा    गोर वंश की सभ्यता पांचो लोटा कलश भर पांचो जाती संयोग | भांग कसुमल घुगरी संपत रखलो भोग ||  पांचो की पंचायती सोल- अठरा प्रमाण | बणजारा हिरदे घरो गोकुल का फरमाण ||  क्षत्रिय पलट मीला गौर से मत जाणो अभमान |  बणजारा बणज कार से वो है आदि जान||  कंवरपाल राठोड था चित्र पाल चौहान |  उत्तमचंद था याद वे सुखपाल तवर कहाण ||  राजा भोज पवार था ये पांचो पंच जाण |  वतीय ने कंचन कियो उदीयापुर आई ठाण ||  भैंसा रोड़ा भाई था भैस रोड गड जाण ।  बंजारों की किर्ति कहाँ तक करु || गोर वंशवाळी : राठोड, चव्हाण, पवार, तंवर, जाधव
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बदु नायेक मारो तुकारी, सामका धुडेन जारी,

  सामका याडी, बदु नायेक मारो तुकारी, सामका धुडेन जारी,  भर-भर वोल्डी देरोचरे बावालाल,  डेरामाई धुड नकायोरं छोरी आंग छोरी चालचरे बावालाल,  डेरामाई घुड नकायों र सामकान केरो सेवालाल,  तु कुळशे बापेर सामका केरी सेवालालेन खरो बाप तु छी सेवालाल तु निमते से बाप मारो तुकाराम सेवालाल केरो तुकारामेन तारी छोरी सामका देदर जेतान पान खादो, गोळखादो, जोडो दोई हाथ, तारी मारी भाया आव जलमेरी साथ Samka yadi,  बणजारों की दिव्य नारियों में सामका याडी का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के बणजारों द्वारा 'सामका याडी की बड़ी भक्ति के साथ पूजा की जाती है। बणजारे कवि अपने लोकगीतों के माध्यम से समाज की सामाजिक व्यवस्था को * चित्रित करते हैं। सामका याड़ी के सम्बन्ध में अनेक कथाए सुनने को मिलती हैं। कथाओंके अनुसार, सामका याडी एक गरीब परिवार की लड़की थी, वह रोज काम पर जाती थी, एक दिन सेवालाल ने सामका याडी को काम पर रखा। सामका याडी की मेहनत देखकर सेवालाल ने खुश होकर पूछा, तुम किसकी बेटी हो? सामकाने उत्तर दिया कि मैं आपकी पुत्री हूं क्योंकि आप सभी के स्वामी ह...

गुरु लाधो रे गुरु लाधो रे

  गुरु लाधो रे  गुरु लाधो रे .. माखन शाह  कौन हैं  बाबा मखन शाह लबाना, बाबा माखन शाह लबाना का जन्म सन् 1619 में कर्नाटक के हम्पी शहर में हुआ था. बाबा माखन शाह लबाना (पेलिया वणजारा) का नाम सिख इतिहास में बड़े आदर के साथ लिया जाता है. बाबा माखन शाह लबाना 7वें, 8वें और 9वें सिख गुरु साहिब के समकालीन थे. गुरु साहिबान के प्रमुख मसंदों में से एक थे माखन शाह: वह एक सिख थे जो लोगों को उनके बारे में जानने से पहले नौवें गुरु से मिले थे। आठवें गुरु ने अगले गुरु का नाम नहीं बताया, लेकिन कहा कि वह पंजाब के बकाला में होंगे। माखन शाह एक व्यापारी था। अपने एक अभियान के दौरान, वह समुद्र के प्रचंड ज्वार से मिला। नाव चलाने वाला ज्वार के सामने नाव को नियंत्रित नहीं कर सका, इसलिए नाव रुक गई और एक द्वीप पर फंस गई। काफी प्रयास करने पर भी मल्लाह व अन्य मजदूर नाव को आगे नहीं बढ़ा सके। माखन शाह इससे बहुत परेशान थे। जब सारे प्रयास विफल हो गए, तो उसने गुरु से इस संकट से निकलने में मदद करने की प्रार्थना की। माखन शाह सुरक्षित रूप से भूमि पर लौट आया और अपने निरंतर परिश्रम से एक धनी व्यक्ति बन गया। ...

बाबा हाथीराम बैरागी

  भगवान विष्णु के कलयुग के सबसे बड़े भक्त बाबा हाथीराम बैरागी  बंजारा समाज में जो लोग बालाजी बनाते है , क्या आपको इस का कारण की है मालूम है ? महापुरुषों की शृंखला में ही एक संत हैं बाबा हाथीराम बैरागी। उन्होंने अपने अनन्य प्रेम और भक्ति से न केवल भगवान विष्णु के विश्वरूप के साक्षात्कार के माध्यम से ईश्वर का साक्षात्कार किया बल्कि महाभारत के अर्जुन और गौतम बुद्ध की सेवा भाव की परंपरा को जारी रखा। साथ ही तिरुपति में अपने मठ के माध्यम से हिंदू धर्म के दर्शन और शिक्षा के प्रसार में भी अभूतपूर्व योगदान दिया। जिसे हाल ही में अपने निर्णय में माननीय न्यायालय ने भी स्वीकार किया है। बाबा हाथीराम बैरागी का जन्म उना हिमाचल प्रदेश में हुआ था। इनके जीवन का आरंभिक समय गुनाचौर, पंजाब में बीता। प्रारंभ में ये उत्तर भारत के कई मठों में रहे। काफी समय तक नागौर में भी रहे। बचपन से ही भगवान राम के प्रति उनकी श्रद्धा थी। वास्तविक भगवान और सत्य की खोज के लिए इन्होंने अपना घर बचपन में ही छोड़ दिया था और संपूर्ण भारतवर्ष के तीर्थ स्थलों के भ्रमण के लिए निकल पड़े। धर्म दीक्षा संत परंपरा: तिरुपति के संत हा...